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मेरे अल्फाज़

मुझ अभागे

Pranava Praanjal

1 कविता

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अब तो किस्से हैं बहुत कोई कहानी है नहीं
प्यार के गीतों में अब कोई रवानी है नहीं
हीर रांझे की कोई सच्ची निशानी है नहीं
याद नज़्में इश्क़ की अब मुंह जुबानी है नहीं

तो सारे जग को इक नया आधार मिल जाता
जो मुझ अभागे को तुम्हारा प्यार मिल जाता
भावना के वेग को कोहसार मिल जाता
जो मुझ अभागे को तुम्हारा प्यार मिल जाता

करवटों की आहटें अब बंद सी होने लगी
पाकीजा रिश्तों की ज्योति मंद सी होने लगी
सपने देखें जाग कर वो रात अब बांकी नहीं
साथ में जो बात थी वो बात अब बांकी नहीं

मानवता को प्यार का व्यवहार मिल जाता
जो मुझ अभागे को तुम्हारा प्यार मिल जाता
खाली बैठी वीणा को झंकार मिल जाता
जो मुझ अभागे को तुम्हारा प्यार मिल जाता ।।

-प्रणव


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