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Teri chahat

मेरे अल्फाज़

इन रास्तों से गुजरा तब जाना

Pramod Singh

5 कविताएं

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इन रास्तों से गुजरा तब जाना कि
आवारगी क्या होती है
तेरे मासूमियत भरे सवालों की
अहमियत क्या होती है
'सागर' उलझा हुआ है
खुद के तूफानों से अब,
पर्वतों सा ढीठ एहसास दिलाता है कि
शख्शियत क्या होती है...

आवाज़ की कशिश पर ज़िक्र तेरा
तिजारत क्या होती है
ख़्वाब की हर शह पर साया तेरा
मिल्कियत क्या होती है

तू है तो मैं बचा हूं खर्च होने से
इन बाज़ारों में,
शब्द-शब्द तेरा ही नाम उधेड़ता कहता
मोहब्बत क्या होती है

- सागर

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