महबूब मेरे

Mehboob mere
                
                                                             
                            महबूब मेरे, तेरी आंखों से, मैंने पी ली है मदिरा सारी,
                                                                     
                            
अब कौन जगाए, बेहोशी से, मैं भूल चुका दुनियादारी 
महबूब मेरे, मुझे इतना बता, तू कौन नगर से आई है,
इतनी मदिरा, इन नैनों में, तू भरकर कहां से लाई है 
तू चलती फिरती मधुशाला, कहीं जाम जमीं पे झलक ना जाए,
नजरें झुका कर चला कर, कहीं कोई खुशी से, मर ना जाए 
वक्ष, वृक्ष से फलित है, तू हिरण चौकड़ी भरती है,
तू तेज कटारी से तिखी, इतना जुल्म क्यों करती है 

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1 month ago
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