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मेरे शहर को

                
                                                                                 
                            मेरे शहर को लहराती हवा दे दो।
                                                                                                

पंतगों का मौसम है थोड़ी सी ढील दे दो।।
हमें बैमौसम उड़ने का शौक तो है।
लेकिन परिन्दों के साथ रहनें की फितरत दे दो।

मेरे शहर को कोई रोशनी दे दो।
बच्चे काबिल बन जायें, लालटेन में तेल दे दो।।
रोजी रोटी कमाकर खाते तो सब हैं।
लेकिन दिलों में प्यार जिन्दा रहे ऐसी फुर्सत दे दो।।

मेरे शहर को कोई दरिया दे दो।
बिगड़ती हवा में थोड़ी सी नरमी दे दो।
सांसे लेनें में कोई मशक्कत न करनी पड़े।
हमें बिना रोकथाम के ही ऑक्सीजन दे दो।


गौरव सक्सेना
354 – करमगंज, इटावा
 
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6 months ago

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