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मेरे अल्फाज़

विकास का पत्तो

prafull

1 कविता

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विकास का पत्तो का घर ढहने वाला है
बचा सकते हो तो बचाओ सब कुछ बहने वाला है
रोजगार के किले तो पहले ही टूट गए है इस जहां में सबके
ज़िन्दगी में अब सांसों का मकान भी अब ढहने वाला है
- प्रफुल्ल सक्सेना


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