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मेरे अल्फाज़

मेरी इस वक़्त की शांति

Pradeep Mukherjee

132 कविताएं

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इतने तूफान , भूचाल
ज्वालामुखी, सुनामी
झेल कर भी शांत हूं मैं
क्योंकि मैं जानता हूं कि फ़िलहाल
शांत रहना और शांति बनाए रखना ही
समय की मांग है
समय बदलता है
सभी जानते हैं
लेकिन , क्या यह ऊंट की तरह
बदलता है कभी करवट भी ?
कहना कठिन है
लेकिन फिलवक्त शांत रहना
मेरी विवशता है
और कुछ हद तक यह मेरी रणनीति और कार्यनीति
का हिस्सा भी है
जानते हैं सभी
और अनुभव किया होगा कितनों ने ही
कि तूफान से पहले होता है
एक गहन शांति का वातावरण
मेरी यह शांति या मेरा शांत रहना भी
क्या छिपाए हुए है
कोई तूफान अपने गर्भ में ?
बेशक समय बता पाएगा इसे
और अगर समय भविष्य में
करवट बदले ऊंट की तरह
तो क्या होगा मेरा तब हाल
या कोई और होगा हाल-बेहाल
यह बता पाना
संभव नहीं फिलवक्त।

- डॉ. प्रदीप कुमार मुख़र्जी

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