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मेरे अल्फाज़

घूमते हुए भाग रहा है समय

Pradeep Mukherjee

112 कविताएं

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मिल जाए भागते चोर की लंगोट
तो मन में रहता है थोड़ा संतोष
लेकिन भागते समय का तो
कुछ भी नहीं छू सकते आप
क्योंकि वह तो होता है निराकार
उसको देख भी नहीं सकते आप
क्योंकि होता है वह अदृश्य
समय तो बस भाग रहा है अपनी गति से
दिन के बाद रात
और रात के बाद दिन
अंधेरे-उजाले के बीच
घूम रहा समय का चक्र
प्रश्न है कि -
समय भाग रहा है ?
घूम रहा है?
या घूमते हुए भाग रहा है?
घडी की सुइयों को एक बार
देख लीजिए आप
एहसास हो जाएगा आपको
घूमते हुए भागते समय का
यह भागता समय घुमा देता है सबको
तभी तो समय के बलवान होने का
एहसास होता है हम सबको।


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