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मेरे अल्फाज़

गांधी जी को भी प्यारे थे राम

Pradeep Mukherjee

112 कविताएं

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सौम्य शांत शिष्ट
यही छवि है राम की
जो आदर्श हैं सबके
तारणहार इस निस्सार भव के
वचन पालन करने का नाम है राम
तपस्या का नाम है राम
बलिदान का नाम है राम
अन्याय के विरुद्ध खड़े होने
तथा वीरता प्रदर्शन करने का नाम है राम
करना नहीं आसान पालन
राम जैसा आदर्श जीवन
चौदह वर्ष तक जिनका घर था वन
अनेक राक्षसों का वध राम ने किया
रावण-कुंभकरण का वध भी रावण ने किया
अनुज लक्ष्मण ने इसमें उनका बड़ा साथ दिया
मेघनाद वध में अपना विशेष योगदान दिया
है राम राज्य की चर्चा करते सभी
प्रजा थी जिसमें बहुत सुखी
राम-सीता की जुगल जोड़ी
सबके मन पर इसने छाप छोड़ी
लेकिन , लोक लाज के भय से
सीता को भी त्यागा राम ने
सबके लिए एक नया उदहारण
प्रस्तुत किया राम ने
गांधी जी के भी प्यारे थे राम
अंतिम सांस उन्होंने ली कहकर 'हे राम' ।


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