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मेरे अल्फाज़

नारी-सतरंगी

Pradeep Kumar

6 कविताएं

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क्या रूप तेरा क्या रंग तेरा
न पहचाने रहकर संग तेरा
सतरंगी है हर हाल में तू
कभी साया है कभी धूप है तू
कभी बादल है तू कभी बिजली है
कभी गरजती कभी बरसती
उसपर भी इंद्रधनुष सी सतरंगी है तू
कुदरत से है नाता तेरा
जननी तू प्रेम का सागर है
हर रूप तेरा हर रंग तेरा
मुझको रंगा दे संग तेरा
खुद सतरंगी होकर अब
मुझमे रंग दे कुछ अंश तेरा

दीप

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