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मेरे अल्फाज़

बनो निरंकुश...

Pradeep Kumar

28 कविताएं

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बनो निरंकुश मोदीजी दुष्ट स्वजन पर वार करो,
मानवता नहीं होगी कलंकित असुरों का संहार करो।
खीझ रहे जो खीझने दो उनका तो नित्य का पेशा है,
गीता को जो करे कलंकित उनको ना स्वीकार करो।।

अधम, नीच, पापी है वो जो बाला का अपमान करें,
नीयत कुकर्मी लेकर के जो रक्त का रसपान करें।
समय नहीं दो इन असुरों को, धड़ से शीश हटा दीजै,
बन निरंकुश मोदी जी हर हवसी को बेजान करें।।

दिव्या के तन से खेला है आज एक फिर ठरकी ने,
किया कलंकित मानवता को फाड़ा तन फिर नरकी ने।
आज झाँसी के गद्दार वंश ने फिर से फण उठाया है,
दोगली राजनीती का पांसा फेंका है फिर सनकी नें।।

सब्र का बाँध टूट ना जाये जन-मन तो आक्रोशित है,
इतिहास के पन्ने बोल रहे वीर बना जो शोषित है।
जन-जन की आंदोलित आहें राज मिटा देगी सबकी,
सच कहता हूँ बच के रहना सभी ह्रदय अब रोषित है।।

- प्रदीप कुमार तिवारी
करौंदी कला, सुलतानपुर
7978869045

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