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मेरे अल्फाज़

ज़िंदगी का सफ़र

prachi singh

23 कविताएं

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ज़िंदगी का सफ़र चलता रहता है
कभी साथ किसी का मिलता तो
कभी साथ किसी का छूटता रहता है ।
सफ़र में मिलते हैं कई नए राही
जिनका मिलना जरूरी होता है
ज़िंदगी के सफ़र में उनका भी
अहम हिस्सा होता है।
ज़िंदगी का सफ़र चलता रहता है
कभी साथ किसी का मिलता
तो कभी साथ किसी का छूटता रहता है।
ज़िंदगी के सफ़र में बहुत से कांटे मिलेगे
सब्र रख कर चलना तू ऐ राही मंजिल जरूर मिलेगी।
सफ़र में कुछ ऐसे भी मोड़ आते हैं
बीच सफ़र में कुछ अपने छूट जाते हैं।
ज़िंदगी के सफ़र में गुजर जाते हैं
खूबसूरत लम्हें मुसाफ़िरों की तरह यादें
वही ठहर जाती हैं ठहरे हुए रास्तों की तरह।
ज़िंदगी का सफ़र चलता रहता है
कभी साथ किसी का मिलता
तो कभी साथ किसी का छूटता रहता है।


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