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मेरे अल्फाज़

खुद में खुदा है मां

Prachi Deepak

59 कविताएं

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मां तू सबसे,
प्यारी है
मां तू जग से,
न्यारी है
ममता की मूरत है तू,
तुझसे ही
दुनिया सारी है।
कोई कहीं मां,
कोई मम्मी पुकारे
सुख-दुख में बस एक
मां को ही निहारे
मां तू सबसे अलग है,
मां तू ही सबसे प्यारी
तू ही है माँ,
साथी मेरी.
मां तुझ से ही तो है
जग फुलवारी...।
पल भर में तू,
मुझे डांट दे
पल भर में गले लगा लेती है
सच तो यह है कि मां तू जहां में,
खुदा का दूसरा रूप होती है।
तभी तो
बच्चों की आंखों के आंसू,
अपनी आंखों में समा लेती है मां।
हर मर्ज की दवा है मां,
खुदा का बेशकीमती तोहफा,
या ये कहूं कि एक दुआ है मां,
मैं तो यह कहूंगी कि खुदा का रूप नहीं,
खुद में ही तू खुदा है मां

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