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मेरे अल्फाज़

क्या संजोय

Prabhat mishra

26 कविताएं

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क्या संजोय बात मे या जज्बात मे
नूर से अंधकार मे या बेवस इन्तजार मे,

सूरज के ताप में या चाँद के रात मे
मन के संतोष मे या दिल के तूफान मे,

कहो जो कहना है अब सब अपने आप में
मै तो पागल हुआ चाँदनी के प्यार मे!!

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