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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल - ये तो मुमकिन है कि हालात बदल सकते हैं

Prabhat Gupta

3 कविताएं

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ये तो मुमकिन है कि हालात बदल सकते हैं।
मगर हम भी बदल जाएं जरा मुश्किल है।।

दिखा के ख़्वाब लोगों को जो हुक़ूमत चलाते हैं।
वो ख़्वाब मुक्कमल हो जाएं जरा मुश्किल है।।

यूं तो कहते हैं वक़्त भर देता है सारे जख़्म।
निशान ए जख़्म भी मिट जाए जरा मुश्किल है।।

किसी अपने की इनायत रही होगी वरना।
पलकों से नींद गैर ले जाये जरा मुश्किल है।।

सपने तो देखते हैं सभी आसान ज़िन्दगी के।
बिना दुश्वारियां सफ़र कट जाए जरा मुश्किल है।।

ख़्वाहिशें दिल में लिए मीलों चलते हैं मगर
नदी के दो किनारे मिल जाएं जरा मुश्किल है।।

- प्रभात गुप्ता


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