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मेरे अल्फाज़

ख़्याल रखना

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24 कविताएं

मैं हूं ना,घर पर
तुम, चिंता मत करना।
संकट की, इस घड़ी में
तुम,देश की सेवा करना।
मैं, परिवार का ध्यान रखूंगी
तुम, "देश" की "रक्षा" करना।
घबराना मत, थोड़ा भी तुम
सेवा सभी की "मन" से करना।
"याद" कभी जब ,आए हमारी
नैन मूंद महसूस तुम करना।
मैं ,वहीं आस-पास हूं तुम्हारे
ये सोचकर ही काम तुम करना।
मैं,याद नहीं करूंगी तुमको,क्योंकि
हर लम्हा-हर पल तुम्हें ही,जीती हूं मैं।
फिर भी यदि ,यादें गहरा जायें तो
हाथ जोड़, मालिक से अपने
फैलाकर दामन को अपने,दुआ में
खैरियत रब से, तुम्हारी मांगूंगी।
कर सको अगर मेरे लिए कुछ,तो
जान मेरी! देश की सेवा के साथ-साथ
थोड़ा ख़्याल,अपना भी रखना।

पूजा द्रौणावत
उज्जैन(म.प्र.)


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