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मेरे अल्फाज़

बेटी की पुकार...

Pooja Pandey

2 कविताएं

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कैसे मैं घर चलाऊंगी ?
कैसे मैं एक इजींनियर डॉक्टर बनाउंगी ?
माँ पापा कैसे मैं वो अक्षर बनाउंगी ?माँ एक बात पूछू माँ बोलते है तो लिखते कैसे है ,हिंदी के अक्षर दीखते कैसे हैं ?
स्कूल कैसा दीखता है मैं ये कैसे समझ पाऊँगी अगली पीढ़ी को मैं कैसे पड़ा पाऊँगी?
जिंदगी मैं कुछ करना है मुझे अपनी राह मैं खुद बनाउंगी,
माँ मैं जिंदगी मै अनपढ़ नहीं कहलाउंगी. माँ आज मेरा साथ दे कल मैं भी एक ससक्त माँ कहलाउंगी.
माँ मुझे भी दे दै स्कूल बस्ता इंतज़ार कर रहा है शिक्षया का रस्ता.
माँ आज दे दै तू मुझे किताब कल होगा नारी के सम्मान का हिसाब.
माँ मैं तुझे दुनिया दिखाउंगी, मैं भैया को पढ़ाऊंगी.
माँ मैं किसी को अपना गुरु बनाउंगी, माँ मैं अनपढ़ नहीं कहलाउंगी.

पूजा पाण्डेय.लालकुआं नैनीताल

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