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मेरे अल्फाज़

सियासत के खेल

Poet Akash

51 कविताएं

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ये सियासत है याराें इसका खेल निराला है
काेई हारने वाला है ताे काेई जीतने वाला है

ये तमाशा फिर पाँच सालाें बाद आना है
काेई जीतने वाला है ताे काेई हारने वाला है

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