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मेरे अल्फाज़

चढ़ती उम्र के मचान पर ढलते ढलान मिलेंगे

P.k. Khyal

47 कविताएं

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चढ़ती उम्र के मचान पर ढलते ढलान मिलेंगे
जंहा महफ़िल थी वो सब रस्ते वीरान मिलेंगे।

कितने ही अरमान होते हैं दिल के जवानी में
रफ्ता रफ्ता गुजरेगी सब दिल बेज़बान मिलेंगे।

बिना सोचे समझे खाते थे पीते थे यारों के संग
बिना चीनी की चाय पीने वाले मेहमान मिलेंगे।

उम्र पर तो वश चलता नहीं किसी का ज़माने में
जो यारों के संग रहेंगे उनके दिल जवान मिलेंगे।

- पी के ख्याल

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