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मेरे अल्फाज़

संघर्ष

Piyush Godiyal

3 कविताएं

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जो कहते नहीं बात करके दिखाते
नया मूल्य जीवन का जग को सिखाते
चमकती है चेहरे पर आभा निराली
यही बात लगती है संघर्ष वाली
असफलता के ताले को गर खोलना है
सफलता की कुंजी को तो खोजना है
जरूरी हो तुझ में कि साहस रहे पर
नहीं हारकर झुकेगा कभी सर
जहां लग रहा है अभी मैं हूं खाली
यही बात लगती है संघर्ष वाली
सूरज से पहले जो जगने लगे तो
है मंजिल यही सोच चलने लगे तू
हो कंकड़ हो पत्थर सफर हो सुहाना
नहीं कर सकोगे कहेगा जमाना
वही कार्य की खोज करके दिखा ली
तो यही बात लगती है संघर्ष वाली
उठो जाग जाओ है लक्ष्य प्राप्त करना
जग की अपंग बातों से न डरना
जो कर ना सके कुछ तुम्हें भी कहेंगे
वह कुएं के मेंढक वही ही रहेंगे
किस्मत को छोड़ो जो मेहनत आजमा ली
तो यही बात लगती है संघर्ष वाली
सफलता मिलेगी चरम तक तो जा
कितना है साहस जरा आजमा
इक दिन तू खुद का मुकद्दर बनेगा
जीवन सुनहरा तो खुद का चुनेगा
फिर दुनिया तेरी होगी सबसे निराली
बस एक बार कर बात संघर्ष वाली


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