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Mere badte kadam

मेरे अल्फाज़

मेरे कदम

Pinky joshi

1 कविता

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सोच रही हूँ मैं माँ
जो खवाब धुंधला सा था तुने
उसको आईना बना दिया
पैर रुकते भी नही थे जमीन पर
और तुने
चलना सिखा दिया
जो ना पड़ सकी किताबों में
वो भी तूने सिखा दिया
दुनिया की भीड़ में
खो ना जाऊँ तुने इस काबिल बना दिय़ा
था जो अँधेरा मेरी ज़िन्दगी में
उसको रोशन बना दिया
तुने खुद की खुशियों को दफना कर
मेरे खवाबों को सजा दिय़ा

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