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"phir aajakal tere shahar kee hava" "mere aparaadh chal rahee hai bevajah hee" "yah hai phir mera ri

मेरे अल्फाज़

फिर आजकल तेरे शहर की हवा मेरे खिलाफ चल रही है

गिरीश आजाद

11 कविताएं

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फिर आजकल तेरे शहर की हवा
मेरे खिलाफ चल रही है बेवजह ही
लगता है फिर मेरे खिलाफ
साजिस चल रही बेवजह ही

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