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मेरे अल्फाज़

मेरी लडा़ई

Parshuram Shinde

1 कविता

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लहरों मेरी आवाज दबा जरूर लोगे
मैं तैरना जाणता हूं डुबा कैसे लोगे

मंजिले तो मेरा इंतजार करती है
ये रास्तो मुझे थमा कैसे लोगे

पसिने के महक से लबालब हूं मैं
ये अत्तरो मुझे लुभा कैसे लोगे

मेरी रफ्तार तुम्हारे बस की बात नहीं है काटो
मैं जो कुचल दूं तो बच कैसे लोगे

हम लड़ेेें गे और जरूर लड़ेेेंगे
बेबस मुश्किलो हमसे जीत कैसे लोगे

राम


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