पानी भी होगी मधुशाला

                
                                                             
                            मैंने पत्थर को काट छाट कर , मन की मूरत में बदल डाला ,
                                                                     
                            
कभी राम कहा , कभी श्याम कहा ,कभी देखी त्रिनेत्र की ज्वाला ,
सदियों पूजा पर पाया नहीं  , न पी पाया भक्ति की हाला ,
फिर सोचा देखूूूं मैं खुद को बदल , मन मस्त मगन हुआ मतवाला,
मन ही में मुझे भगवान मिले , कभी कौशल्या नंदन कभी नंदलाला ,
है सार यही बस जीवन का ,दुनिया को नहीं खुद को बदलो ,
तुम बदलोगे जग बदलेगा , पानी भी होगी मधुशाला ,
पानी भी होगी मधुशाला , पानी भी होगी मधुशाला ....
....पंकज.....


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1 year ago

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