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मेरे अल्फाज़

खादी तुम्हें ढँक लेगी

Pankaj Singh

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*खादी तुम्हें ढँक लेगी

चाहे लगा लो देशद्रोह का नारा
चाहे करवा दो दंगा सारा
चाहे खेलवा दो खून की होली
चाहे तो चलवा दो गांधी पर गोली
फिर कोई मुसीबत आन पड़ी तो
तो खादी तुम्हें ढँक लेगी ।

चाहे कर दो हत्या किसी की
चाहे तो लूट लो अस्मत किसी की
चाहे तो जला दो झंडा प्यारा
चाहे तो बिकवा दो मुल्क सारा
फिर कोई मुसीबत आन पड़ी तो
खादी तुम्हें ढँक लेगी ।

चाहे तो निचोड़ लो खून किसान का
चाहे तो जान ले लो वीर जवान का
चाहे तो घड़ा में भरकर रखो पापों को
चाहे दूध पिलाओ आस्तीन के सांपों को
फिर कोई मुसीबत आन पड़ी तो
खादी तुम्हें ढँक लेगी।

है उम्मीद एक दिन लेकिन
तूफान ऐसा आएगा
तुम नंगे हो जाओगे और खादी उड़ जाएगी
जनता की आह ऐसी निकलेगी
दिल्ली का दरबार हिल जाएगा
तेरा खादी यहीं रह जाएगा
बस तू मिट्टी में मिल जाएगा ।


✍पंकज कुमार सिंह


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