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मेरे अल्फाज़

हिंदी को नमन

Pankaj Singh

15 कविताएं

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*हिंदी को नमन*

सबसे पहला नमन है देश हिन्दुस्तान को
फिर नमन है माँ समान हिंदी ज़बान को ।

फिर नमन करता हूँ उस शख्स महान को
जिसने हिंदी का सौन्दर्यबोध कराया जहान को

नमन करता हूँ सूर, तुलसी, कबीर, रसखान को
नमन करता हूँ दिनकर, महादेवी, जयशंकर सम विद्वान को
नमन करता हूँ निराला के समर्पण की शक्ति को
नमन करता हूँ नागार्जुन की हिंदी भक्ति को ।

एक नमन करता हूँ उस इंसान को
जो बढ़ा रहे हैं हिंदी के सम्मान को

सबसे पहला नमन है देश हिन्दुस्तान को
फिर नमन है माँ समान हिंदी ज़बान को।


पंकज कुमार सिंह

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