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मेरे अल्फाज़

मेरी हिम्मत मेरे पिता

PANKAJ SHARMA

7 कविताएं

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कहता नहीं पर,
प्यार बहुत करता हूँ,
हर राह पर प्रतीक्षा
आपकी करता हूँ।

हर सुख और ख़ुशी का,
त्याग किया आपने,
हर ख्वाब हर तमन्ना,
मेरी पूरी की आपने।

जिक्र तो नहीं करते,
पर प्यार आप भी करते हैं,
हर सदस्य को एकता में,
बांध के रखते हैं।

किया जरूर दूर मुझे,
अपनी नजरों से,
कहीं परेशान न हो जाऊं,
बुरी नजरों से।

अब तो हर माहौल में,
जीना सिखा दिया।
आपने तो जीवन का,
सागर ही दिखा दिया।

बहुत सी बातों से,
था मैं अनभिज्ञ,
जिनका था जीवन से,
बहुत बहुत औचित्य।

अकेले की दुनिया अब,
वीरान सी लगती है,
आपसे दूर हो के,
ये ज़िन्दगी बोझ सी लगती है।

सोच के आपको,
हिम्मत लौट आती है,
नकारात्मकता जाने कहाँ,
लुप्त हो जाती है।

ऐसे ही बात बात पर,
हिम्मत देते रहिएगा,
कहियेगा कुछ नहीं,
पर अपना ख्याल रखियेगा।

~पंकज शर्मा

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