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खामोशी की चीख

मेरे अल्फाज़

खामोशी की चीख

Pankaj Sharma

17 कविताएं

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खामोश क्यों हो तुम इतना 
कोई नहीं जो सुनें तुम्हें 
या सुनकर भी अनजान बने।

क्यों सहती तुम दर्दों को 
क्या कोई नहीं हमदर्द बने
या दर्दों से अनजान रहे।

कितनी परीक्षाओं से गुजरोगी 
कोई नहीं जो कुंजी हो 
या प्रश्नों से अनजान रहे ।

इन खामोशी की चीखो को,
कोई तो हो जो सुन पाये,
या सुनकर भी अनजान रहे ?
एक बार तो दोस्त पुकारो,
कोई तो है जो दोस्त रहे,
या दोस्तों से अनजान रहो ।

कुछ तो बोलो दोस्त मेरे,
न यूं तुम बस परेशान रहो ,
बस अब बस मत तुम अनजान रहो ।

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