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मेरे अल्फाज़

मैने उनके अधरों को गुलाब क्यूँ कहाँ

P Rai

20 कविताएं

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साहित्य 

अपनी हदों में समुन्दर लिए बैठी है यादें
मेरी ज़िद को किनारों सा समेटती है यादें।

मैंने उनके अधरों को गुलाब क्यूँ कहा
बात मेरे दिल की खूब लिखती है यादें।

थोड़ा रुक ,ठहर, प्रश्न चिन्ह लिए वृतांत
सुलग कर कभी कभी दहकती है यादें।

साहिल की रेत पे लिखमिटाता था पहले
उन फ़सानो से खूब लिपटती है यादें।

जिंदगी की किस घड़ी क्या मोड़ आया
मैं समझ सकूँ , उस जगह छोड़ती है यादें।

कुछ पल मैं चूरा के लाया यूँ ही शोखियाना
गुजरे पल की मस्ती में बहकती है यादें।

मैं टूटा सा किन्तु शब्द निखरे निखरे से
यादों के फूल बनकर महकती है यादें।

बुरे से बुरा अच्छे से अच्छा जो हुआ
मेरे अनुभवों को खूब लपेटती है यादें

कुछ पन्नो पर दर्द कुछ पे खुशियां लिखी
पतझड़ में भी बहारे सहेजती है यादें।

पीराय राठी
भीलवाड़ा, राज

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