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मेरे अल्फाज़

भारतीय सेना के सम्मान में गीत

Omprakash merotha

15 कविताएं

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में बारंबार नमन करता हूं
भारत के वीर शहीदों को
नमन करूं उनकी उस धन्य जवानी को
उनके उस धन्य समर्पण को
है नमन मेरा उन माताओं को
जिन्होंनें अपने बेटे खोये
जिनकी पथराही आंखो ने
है रक्त - रक्त आंसू रोये
जिसने उनको पाला था
जो , जी भरकर रो भी न सके
जो कतरा कतरा मरते है
है पिता वो धन्य शहीदों के
हर रोज जो जीकर मरते है
है नमन मेरा उन विधवाओं को
जिन्होंनें अपना सब कुछ खोया
जब महेंदी वाले हाथो ने
सिंदूर स्वयं अपना धोया
नमन करू उन बच्चो और मासूमों को
जिनके कोमल से हाथो ने
कितनी मासूम निगाहों से
जब अग्नि पिता को दी होगी
क्या बीती होगी बहनों पर
राखी वाले उस शुभ दिन पर
जब देख़ वह रक्षा सूत्रो को
तब फूट - फूट रोयी होगी
है धन्य तिरंगा लिपट गया जो
उसके धन्य समर्पण पर
है नमन मेरा सो बार नमन
भारत के वीर शहीदों को

- ओमप्रकाश मेरोठा हाड़ौती कवि

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