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मेरे अल्फाज़

भगत सिंह के सपने पर कविता

Omprakash merotha

59 कविताएं

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भगत सिंह की भक्ति का,
भारत माता की शक्ति का
मैं जज़्बा लेके बेठा हूं ,
कोई नहीं जानता उसको
मैं आज बताने वाला हूं
ख़ून खौलता मेरे दिल का
वह ख़ून उबलने वाला है
इंकलाब के जयकारों से
आवाज़ उठाने वाला हूं
उठो जवानो में तुम को
वो मैदान दिखाने वाला हूं
जहां भगत सिंह ने अपनी मां
को गले लगाया था ।
मां लेकर आई थी आशा
बोलेंगे सब एक ही भाषा
लेकिन अपने ही राष्ट्र के गद्दारों ने
हिंदी को इंग्लिश बना दिया
फिर क्यों कहते हो तुम सब
की मातृभाषा को भुला दिया
इसी बात का दर्द है मुझ को
जिसने ही उन तीन मासूमों को
फांसी के फंदे झूला दिया
जागो तुम मेरे वीर जवानों
हक तुम्हारा छीना हे
राष्ट्रभाषा को फिर से पाओ
यह भगत सिंह का वादा है

छबड़ा जिला बारां ( राजस्थान )


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