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मेरे अल्फाज़

शेर, मेरी कलम से

Om Gopal

109 कविताएं

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ख़्वाहिश है इक बार वो,बाहों में ले-लें मुझे।
कौन कम्बख्त फिर,जीने की हसरत रखता है।।


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