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मेरे अल्फाज़

मेरा हिंदुस्तान

Om Gopal

39 कविताएं

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थके मन, शिथिल देह लिए, घिसटते हुए लोग
मुरझाए चेहरों पर निराशा के घने बादल
जीवन में कुछ भी न कर पाने की कसक
क्या यही मेरा हिंदुस्तान है?
विवेकानन्द का उद्घोष150 बरस में भी
क्या कर पाया है -
आम भारतवासी
अशिक्षा, गरीबी व रोग से
कहाँ उबर पाया है -कहाँ उबर पाया है

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