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मेरे अल्फाज़

क़ुदरत और इंसान

Om Gopal

39 कविताएं

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वो ही चाँद, वो ही तारे, वो ही आसमां है 
आज भी इस जग का, वो ही पासबां है।।

वो ही ज़मी, वो ही सागर, वो ही घाटियाँ हैं
लाल- पीली -काली, वो ही माटियाँ हैं।।

बदली है तो बस, इंसान की फ़ितरत बदल गई है
इंसान की बदोलत, ये दुनिया बदल गई है।।

हर सुबह, चीज़ों का, भाव बदलता है
हर पल आदमी का, स्वभाव बदलता है -स्वभाव बदलता है।।

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