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मेरे अल्फाज़

फुर्सत नहीं किसी को, खुद के पास आने की

Om Gopal

79 कविताएं

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मसरूफ़ हूँ,परेशान हूँ,तू ही बता ए जिंदगी।
कैसे निकालूं फुर्सत, तुझसे बात करने की।।

काश जिंदगी में मिल जाए वो,फिरसे किसी मोड़ पर
कुछ अपनी कहें,कुछ उनकी सुने,फुर्सत से बैठ कर।

मौसीकी ही मौसीकी है, दुनिया में हर तरफ
फुर्सत नहीं किसी को,दो पल गुनगुनाने की।
उलझनों से घिरा इंसान ,खुद से दूर है
फुर्सत नहीं किसी को,खुद के पास आने की।।

फुर्सत नहीं किसी को,खुद के पास आने की।


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