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मेरे अल्फाज़

चेहरे पहचानने का हुनर

Om Gopal

109 कविताएं

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चेहरे पहचानने का हुनर,बेमानी हो गया।
चेहरे पर कई चेहरे लगाए रखते हैं लोग ।।

तनहाई में अक्सर,खुद से पूछता हूं मैं ।
दौलत कमाने के लिए,दुनिया में आया था।

जानता हूँ मुकद्दर में, रोशनी नहीं लेकिन ।
ताज़ा हवा के लिए खिड़की,हर सुबह खोलता हूं मैं।।

ये जानता हूँ उसने, भुला दिया है मुझे।
ये दिल ,नादां है, मानता नहीं।।


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