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मेरे अल्फाज़

ज़ुल्म

Nizam Fatehpuri

26 कविताएं

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ग़ज़ल- 212 212 212 212
फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन

ज़ुल्म कितना वो ज़ालिम करेगा यहाँ।
तख़्त उसका भी इक दिन गिरेगा यहाँ।।

जितने आए थे पहले चले सब गए।
जो भी पैदा हुआ वो मिटेगा यहाँ।।

ताज तेरा रहा है न मेरा रहा।
वक्त के साथ हर दम फिरेगा यहाँ।।

आग नफ़रत की मिलके बुझायेंगे हम।
भाई भाई गले फिर मिलेगा यहाँ।।

बाद पतझड़ के आती बहारें सदा।
फिर से गुलशन हमारा खिलेगा यहाँ।।

काम ऐसा करो की ख़ुदा ख़ुश रहे।
लेके जाएगा क्या जब मरेगा यहाँ।।

संविधान आज है तो निज़ाम आज है।
देश सबका है सबका रहेगा यहाँ।।

निज़ाम-फतेहपुरी
ग्राम व पोस्ट मदोकीपुर
ज़िला-फतेहपुर (उत्तर प्रदेश)


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