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मेरे अल्फाज़

मेरी कलम से

Nitu Khetan

59 कविताएं

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मेरी कलम से

रिमझिम-रिमझिम बारिश की बौछारें

मन में एक हलचल मचाऐं
यादों की ये संदूक खुलाऐं
गरमाहट सी उनमें ले आये
प्यारी सी ये मुस्कान हैं लाऐ

मीठी-मीठी सी ये बारिश की फुहारें

चलें जब चंचल शोख़ हवाएं
मिले आपस में इनकी अदायें
छेड़ दे ये मन के हैं सारे तार
होती हैं ऐसी बारिश में बात

गीली-गीली सी बारिश की ये बूँदें

हुआ जो किसी कच्ची कोमल देह से
सावन की पहली बूँदों का आलिंगन
कोमल मन पे हो रहा सतरंगा स्पंदन
जाने किसको खोज रहे उसके नयन

मतवाली सी होती ये बारिश की फुहारें

आ रही है ये कैसी धरा से महक
किसानों के चेहरों पे छाई हैं चमक
हुआ मन विभोर देख वर्षा की धार
छाई है खुशियाँ उनके घर-बार

झर-झर बहती है ये बारिश की बूँदें

भीगना चाहूँ इन बूँदों में आज
जैसे बचपन में भींगती थी भाग
उलझ गयी अपनी यादों के रंग में
बना लूँ एक याद नयी बारिश के संग में

झीनी-झीनी होती बारिश की ये बौछारें

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