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मेरे अल्फाज़

करवाचौथ का उपहार

Nishi Chauhan

2 कविताएं

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आओ साथी हमको दो
करवाचौथ का उपहार
ना लहंगे साड़ी अन्य वस्तुयें
ना कोई मनुहार
ना चाहिए साथी तुमसे हमको
भौतिक से उपहार
देना चाहो दे सको तो
जनम जनम का प्यार
माँ बनके तुम प्यार लुटा दो
पिता की बाहों सा संबल दो
यार बनो मेरा प्यार बनो तुम
जीवन का संसार बनो
इन नैनों में मेरे बैनों में
तुम वीणा की गुंजार भरो
डूब मरुँ विश्वास में तेरे
मेरी आशा में वो नीर भरो
तुम जग हो तुम डग हो तुम
पग पग की मेरी चाल बनो
मैं बन जाऊँ तलबार दुखों की
तुम मेरी खुशियों की ढ़ाल बनो
तुझे निहारूं तुझे संवारूं
तुम मेरा सिंगार बनो
खुशबू बनके उतरूँ मन में
तुम मेरी धड़कन का हार बनो
जीवन में रस भर दो तुम
भ्रमरों का गुंजार बनो
झिलमिल कर दूँ आँगन तेरा
तुम मेरा घर द्वार बनो
मधुर मधुर मुस्कान बिछा दो
इन नैनों के काजल में
इक तस्बीर  सी बन छप जाओ
मेरे तन के तुम आँचल में

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