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मेरे अल्फाज़

ख्वाबों का आशियाना

Nikhil Prakash

2 कविताएं

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मेरे ख्वाबों का आशियाना क्या ग़ज़ब तोड़ आए,
मेरे रहनुमा तुम ये मुझे कहाँ छोड़ आए,

मेरे हाथों को थामकर मुझे अपना जो कहा,
अपनी बाकी की कहानी हम वहीं छोड़ आए,

खाली पन्नों से बनी थी मेरी जिंदगी की कहानी,
उस बेरंग किताब में एक पन्ना हम और जोड़ आए,

लिखा ना गया हमसे ये किस्सा वफा का,
कोरे काग़ज पर हम अपनी कलम तोड़ आए,

था लाल वो चेहरा, अदब से झुकी थीं आँखें,
उन आँखों में हम अपनी जवानी छोड़ आए।

- निखिल प्रकाश राय
कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

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