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मेरे अल्फाज़

यूं ही तेरा आना जाना....

Nikhil Kumar

32 कविताएं

21 Views
वो तेरा यूं ही मिलना
मिल के फिर बिछड़ना
सांसों मे मेरी घुल जाना
लबों पे तेरा नाम आना
लगता है सब कुछ पुराना
काश न आती तू ऐसे तो
ये दिल भी न होता बेगाना
कभी मिल जाएं राह चलते
चोरी से ही नजरें तो मिलाना
ढूंढ लेता हूँ आज भी तुझे
जब खो जाता है यादों मे दिवाना
छलकता है जब जाम
याद आती है वो शबनमी शाम
सिगरेट के धुँए से छल्ले बनाना
जुल्फों को तेरी प्यार से सहलाना
आज भी याद दिला देता है मुझको
मेरी जिंदगी मे आकर तेरा रुठ कर
यूँ ही बिना कुछ कहे चले जाना

- निखिल_कुमार_अंजान

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