आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Bdi takleef hoti h
Bdi takleef hoti h

मेरे अल्फाज़

बड़ी तकलीफ होती है

Nidhi Bansal

11 कविताएं

25 Views
बड़ी तकलीफ होती है

टूटते हैं जब वो सपने जो माँ आँखों में संजोती है
बड़ी तकलीफ होती हैबिखरती है जब वो माला जो माँ उम्मीद से पिरोती है।
बड़ी तकलीफ होती है..

सूखती हैं जब वो फसलें जो माँ अपने तन में बोती है
बड़ी तकलीफ होती है...

दिये जो घाव अपनों ने उसे आंचल से छुपाती हैं
रोता है दिल उसका मगर फिर मुस्कुराती हैं
छुप छुप के पलकों को आँँसू से भिगोती हैं।
बड़ी तकलीफ होती है...

दिल के थे जो टुकड़े आँखों के जो तारे थे
राहें देख देख उनकी अपनी आँखें थकाती हैं
उनकी चिंता में, यादों मे, वो जागी जागी सी सोती है
बड़ी तकलीफ होती है...

सहारा दे के हाथों से जिन्हें चलना सिखाया था
पकड़ कर हाथ जिनका सब करना सिखाया था
ना पल देखा ना घड़ियां गिनी अपना हर वक्त भूलाया था
उस मां को उनके साथ अब ना घड़ी भी नसीब होती है
बड़ी तकलीफ होती है, बड़ी तकलीफ होती है...

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!