बड़ी तकलीफ होती है

Bdi takleef hoti h
                
                                                             
                            बड़ी तकलीफ होती है
                                                                     
                            

टूटते हैं जब वो सपने जो माँ आँखों में संजोती है
बड़ी तकलीफ होती हैबिखरती है जब वो माला जो माँ उम्मीद से पिरोती है।
बड़ी तकलीफ होती है..

सूखती हैं जब वो फसलें जो माँ अपने तन में बोती है
बड़ी तकलीफ होती है...

दिये जो घाव अपनों ने उसे आंचल से छुपाती हैं
रोता है दिल उसका मगर फिर मुस्कुराती हैं
छुप छुप के पलकों को आँँसू से भिगोती हैं।
बड़ी तकलीफ होती है...

दिल के थे जो टुकड़े आँखों के जो तारे थे
राहें देख देख उनकी अपनी आँखें थकाती हैं
उनकी चिंता में, यादों मे, वो जागी जागी सी सोती है
बड़ी तकलीफ होती है...

सहारा दे के हाथों से जिन्हें चलना सिखाया था
पकड़ कर हाथ जिनका सब करना सिखाया था
ना पल देखा ना घड़ियां गिनी अपना हर वक्त भूलाया था
उस मां को उनके साथ अब ना घड़ी भी नसीब होती है
बड़ी तकलीफ होती है, बड़ी तकलीफ होती है...

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X