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मेरे अल्फाज़

अतीत के गलियारे

Nidhi Bansal

26 कविताएं

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चलो आज अतीत के गलियारे में घूम आते हैं
कुछ फूल मीठी यादों के वहां से चुन लाते हैं
चलो आज बीते हुए लम्हों संग वक्त बिताते हैं
जिंदगी की बगिया को सूखे पत्तों से सजाते हैं
चलो आज अतीत के गलियारों में घूम आते हैं।।

बीता वक्त भी कभी काम बड़ा आता है
अंधियारी जिदंगी को कोई लम्हा कल का
फिर से रोशन कर जाता है
कल बीत गया पर भूली नहीं मैं
खुद को ये बताते हैं
चलो आज अतीत के गलियारों में घूम आते हैं।।

कोई तस्वीर वहां ऐसी कही मिल जायेगी
होकर धुंधली भी मेरे आने वाले कल को
जो सजायेगी
कोई राह जिस पर ना चली मैं शायद
आने वाली मेरी राहों को आसान बनायेगी
कहीं भूली बिसरी बातें जो मुझे
याद ना आयी कभी
शायद कोई बात ऐसी मुझे याद आयेगी
होठो पे सजे कोई मुस्कुराहट
जिससे जिदंगी खिलखिलायेगी
चलो सूखे फूलों से ही सही
अपने भविष्य को महकाते हैं
चलो आज अतीत के गलियारों मे घूम आते हैं।।

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