भूख और किसान

                
                                                             
                            ना तो उसको सोना चहिए,ना चांदी से काम है।
                                                                     
                            
ना वो गिनता लाख करोड़ों ,ना हीरे की चाह है,
बस वो मेहनत करता जाता ....
बस वो मेहनत करता जाता ,दो जून की रोटी को
इतने मेहनत पर भी भूखा रहता नाम किसान है......

Hema sawitri gopal rai

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 months ago
Comments
X