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मेरे अल्फाज़

तल्खियाँ

neeraj manchanda

3 कविताएं

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तल्खियाँ थोड़ी, बहुत हैं
हर किसी से,बढ़ाई नहीं जाती

दूरियां चाहे, बहुत हों
हर किसी को,दिखाई नहीं जाती

नजदीकियां, कितनी छिपा लो
दिख ही जाती हैं, दिखाई नहीं जाती

दिल से दिल की दूरियां,कभी
पैमानों में,नपाई नहीं जाती

लोरियां सुनाते हैं, जागते हुओं को
सोते हुए को कभी,सुनाई नहीं जाती

लाख बने रहो, जवां जिंदगी में
उम्र दिखती ही है,छुपाई नहीं जाती

हर कोई मित्र हो, संभव नहीं
हर किसी से दोस्ती,निभाई नहीं जाती

कितनी भी मुश्किलों से, गुजर रहे हो
सभी को वस्तुस्थिति,दर्शाई नहीं जाती

कितने ही जख्म दिए है, जो अपनों ने
सी लिए जाते हैं,नुमाइश कराई नहीं जाती

कैसी भी हो अपनी, आर्थिक स्थिति
सभी के सामने झोलियाँ,फैलाई नहीं जाती

मौलिक एवं अप्रकाशित
धन्यवाद

नीरज कुमार मनचंदा
506 पुलिस लाइन एरिया
नजदीक जिमखाना क्लब
हिसार
मो0-9896002390

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