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Ek tamanna

मेरे अल्फाज़

एक तमन्ना

Neeraj Kumar

34 कविताएं

38 Views
महफ़िल में दूरी तो लाजिमी थी दरमियां
दिल नादाँ है कहाँ ये सब समझता है
तमन्ना थी वो नज़र के सामने रहें
खुश हूं वो भी उतने ही तलबगार निकले

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