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Ek tamanna

मेरे अल्फाज़

एक तमन्ना

Neeraj Kumar

34 कविताएं

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महफ़िल में दूरी तो लाजिमी थी दरमियां
दिल नादाँ है कहाँ ये सब समझता है
तमन्ना थी वो नज़र के सामने रहें
खुश हूं वो भी उतने ही तलबगार निकले

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