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मेरे अल्फाज़

असली दौलत

Navita Johri

1 कविता

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थोड़े से की चाहत में
बहुत कुछ हम खोते हैं
जो मिला वो लगता नाकाफी
ना मिला उसे रोते हैं
होती है खुशी आसपास
फिर भी बेचैन होते हैं
अंधी दौड़ के बन बाशिंदे
काटते वही जो बोते हैं
संतोष की दौलत वाले ही
नींद चैन की सोते हैं

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