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मेरे अल्फाज़

ये आँखे बहुत कुछ बोलती हैं...

Naveen Kumar

10 कविताएं

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पलक झपककर आँखें हमसे,
गिरकर उठना सिखलाती हैं ।
मन के कोमल भाव समेटे,
आँखें तनती, सकुचाती हैं ।।
जुबां जिसे कहने से डरती,
आँखें बरबस कह जाती हैं ।
दामन सच का थामे आँखें,
राज़ दिलों के खोलती हैं ।।
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।

आकार एक में रहकर आँखें,
अविचल रहना सिखलाती हैं ।
पलके बंद हों, फिर भी आँखें,
पल में दुनिया दिखलाती हैं ।।

आजीवन आँखें हम सब को,
हर पल राहें बतलाती हैं 
मृत्युपरांत भी आँखें कुछ पल,
अपनों की बाटें जोहती हैं ।।
ये आँखें बहुत कुछ बोलती हैं ।

-  नवीन कुमार

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