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मेरे अल्फाज़

मरने के लिए बसर करता है आदमी

Nathuram Kaswan

1021 कविताएं

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आरज़ू तो देखिए जीस्त की
जीने के लिए कितना मरता है आदमी
जुर्रत तो ये देखिए मौत की
मरने के लिए बसर करता है आदमी

एन आर कस्वां


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