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मेरे अल्फाज़

उल्फ़त में वतन के जीते हैं उल्फ़त में वतन के मरते हैं

Nathuram Kaswan

435 कविताएं

9 Views
अहले वतन ज़िगर में अपने देश बसाए रखते हैं
सरजमीं से अपनी क़यामत तक मुहब्बत करते हैं
उल्फ़त में इसके जीते हैं उल्फ़त में इसके मरते हैं

एन आर कस्वां
१५.८.१९


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